Thursday, 21 May 2020

दो तपस्वी

             "गज-ग्राह की कथा’’
हाहा-हूहू नाम के दो तपस्वी थे। उनको अपनी भक्ति का गर्व था। एक-दूसरे से अधिकसिद्धि-शक्ति वाला कहते थे। अपनी-अपनी शक्ति के विषय में जानने के लिए ब्रह्मा जी केपास गए। ब्रह्मा जी से पूछा कि हमारे में से अधिक सिद्धि-शक्ति वाला कौन है? ब्रह्मा जीने कहा कि आप श्री विष्णु जी के पास जाओ, वे बता सकते हैं। ब्रह्मा जी को डर था किएक को कम शक्ति वाला बताया तो दूसरा नाराज होकर श्राप न दे दे।हाहा-हूहू ने श्री विष्णु जी के पास जाकर यही जानना चाहा तो उत्तर मिला कि आपशिव जी के पास जाएँ। वे तपस्वी हैं, ठीक-ठीक बता सकते हैं। शिव जी ने उन दोनों कोपृथ्वी पर मतंग ऋषि के पास जाकर अपना समाधान कराने की राय दी। मतंग ऋषि वर्षोंसे तपस्या कर रहे थे। अवधूत बनकर रहते थे। अवधूत उसे कहते हैं जिसने शरीर के ऊपरएक कटि वस्त्रा (लंगोट) के अतिरिक्त कुछ न पहन रखा हो। मतंग ऋषि शरीर से बहुत मोटेयानि डिल-डोल थे। जब हाहा-हूहू मतंग ऋषि के आश्रम के निकट गए तो उनके मोटे शरीरको देखकर हाहा ने विचार किया कि ऋषि तो हाथी जैसा है। हूहू ने विचार किया कि ऋषितो मगरमच्छ जैसा है। मतंग ऋषि के निकट जाकर प्रणाम करके अपना उद्देश्य बताया किकृपा आप बताएँ कि हम दोनों में से किसकी आध्यात्मिक शक्ति अधिक है? ऋषि ने कहाकि आपके मन में जो विचार आया है, आप उसी-उसी की योनि धारण करें और अपनाफैसला स्वयं कर लें। उसी समय उन दोनों का शरीर छूट गया यानि मृत्यु हो गई। हाहाको हाथी का जन्म मिला तथा हूहू को मगरमच्छ का जन्म मिला। जब दोनों जवान हो गएतो एक दिन हाथी दरिया पर पानी पीने गया तो उसका पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया। सारादिन खैंचातान बनी रही। कभी हाथी मगरमच्छ को पानी से कुछ बाहर ले आए, कभीमगरमच्छ हाथी को पानी में खैंच ले जाए। शाम को मगरमच्छ पैर छोड़ देता। अगले दिनहाथी उसी स्थान पर जाकर अपना पैर मगरमच्छ को पकड़ाकर शक्ति परीक्षण करता।पुराणों में लिखा है कि यह गज-ग्राह का युद्ध दस हजार वर्ष तक चलता रहा।आसपास के वन में हाथी का आहार समाप्त हो गया। साथी हाथी दूर से आहार लाकरखिलाते थे। कुछ दिन बाद वे हाथी भी साथ छोड़ गए। हाथी बलहीन हो गया। एक दिनमगरमच्छ ने हाथी को जल में गहरा खींच लिया। हाथी की सूंड का केवल नाक पानी सेबाहर बचा था। हाथी को अपनी मौत दिखाई दी तो मृत्यु भय से परमात्मा को पुकारा, केवलइतना समय बचा था कि हाथी की आत्मा ने र... यानि आधा राम ही कहा, केवल र... हीबोल पाई। उसी क्षण परमात्मा ने सुदर्शन चक्र मगरमच्छ के सिर में मारा। मगरमच्छ कामुख खुल गया। हाथी बाहर पटरी पर खड़ा हो गया। परमात्मा प्रकट हुए। हाथी से कहा कितुम स्वर्ग चलो, तुमने मुझे सच्चे मन से याद किया है, मेरा नाम बड़ी तड़फ से लिया है।मगरमच्छ ने कहा कि हे प्रभु! जिस तड़फ से इसने आपका नाम जपा है, मैंने उसको उसीतड़फ से सुना है, परंतु हार-जीत का मामला था। इसलिए मैं छोड़ नहीं पा रहा था। आपतो अंतर्यामी हैं। मन की बात भी जानते हो। मेरा भी कल्याण करो। प्रभु ने दोनों को स्वर्ग भेजा। फिर से जन्म हुआ।फिर अपनी साधना सुरु की।





https://www.jagatgururampalji.org/gyan_ganga_hindi.pdf

Saturday, 16 May 2020

समय रहते पहचान लो


भविष्यवाणियों से सिद्ध हो चुका है कि वह महापुरुष ही दुनिया को बचायेगा इसलिए Saint Rampal Ji को
#समय_रहते_पहचान_लो
🔮जगत का तारणहार इस धरती पर आ चुका है, वही दुनिया के दुख दूर कर सकता है।
#समय_रहते_पहचान_लो
🔮भारत का एक महान संत, भारत ही नहीं पूरे विश्व में स्वर्ण युग लाएगा।  #समय_रहते_पहचान_लो
🔮प्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं ने कहा है कि भारत का एक महापुरुष ही तीसरे विश्व युद्ध को रोकेगा व दुनिया में शांति लाएगा 
#समय_रहते_पहचान_लो
🔮असली संकट मोचन, असली जीवन रक्षक आज हमारे बीच है। #समय_रहते_पहचान_लो उनको।  वही है जो सारी मुसीबतों, आपदाओं, कष्टों से बचाने की गारंटी देता है।
🔮भारत का एक परम संत सतभक्ति देकर सबके दुख दूर करने आया है। उसका उद्देश्य केवल परमार्थ ही है। वही आत्मा को सुखी करके उसके स्थायी निवास सतलोक पहुंचा सकता है।
🔮एक ऐसा महापुरुष जो मानव को हमेशा के लिए काल के जाल से छुड़वाकर अविनाशी धाम ले जाएगा। वह आज भारत की पवित्र भूमि पर मौजूद है। उसे #समय_रहते_पहचान_लो
कहीं ऐसे न बने
अच्छे दिन पीछे गए सतगुरु से किया न हेत।
अब पछतावा क्या करे जब चिड़िया चुग गयी खेत।।
🔮सतगुरु रामपाल जी महाराज मानव कल्याण के लिए ही इतना संघर्ष कर रहे हैं। वही धरती पर जीव का उद्धार करने व मोक्ष देने के लिए आये हैं। उनको #समय_रहते_पहचान_लो
🔮सतगुरु रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर सर्व मानव समाज मानव धर्म का पालन करेगा और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सतलोक जाएंगे।
🔮संत रामपाल जी महाराज को पहचानिए!
नास्त्रेदमस ने कहा था स्वतंत्रता के चार वर्ष बाद 1951 में भारत में एक महान संत का जन्म होगा जो विश्व को नऐ ज्ञान से परिचित कराएगा। 8 सितंबर 1951 को संत रामपालजी महाराज का जन्म हुआ, ये भविष्यवाणी उन्हीं के लिए हुई है।
🔮पहचानिए कौन है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के अनुसार वो महान संत
”जिस समय उस तत्वदृष्टा शायरन का आध्यात्मिक जन्म होगा उस दिन अंधेरी अमावस्या होगी। उस समय उस विश्व नेता की आयु 16, 20, 25 वर्ष नहीं होगी, वह तरुण नहीं होगा, बल्कि वह प्रौढ़ होगा और वह 50 और 60 वर्ष के बीच की उम्र में संसार में प्रसिद्ध होगा। वह सन् 2006 होगा।“
🔮नास्त्रेदमस के अनुसार वह विश्व धार्मिक नेता सतगुरु रामपाल जी महाराज ही हैं जिनकी अध्यक्षता में भारतवर्ष पूरे विश्व पर राज्य करेगा। पूरे विश्व में एक ही ज्ञान (भक्ति मार्ग) चलेगा। एक ही कानून होगा, कोई दुःखी नहीं रहेगा, विश्व में पूर्ण शांति होगी।
🔮इंग्लैण्ड के ज्योतिषी ‘कीरो’ ने सन् 1925 में लिखी पुस्तक में भविष्यवाणी की है, बीसवीं सदी अर्थात् सन् 2000 ई. के उत्तरार्द्ध में भारत का वह एक व्यक्ति सारे संसार में ज्ञानक्रांति ला देगा।
🔮भाई बाले वाली जन्म साखी में भी लिखा है कि उस महान संत का जन्म जाट जाति में होगा और उसका प्रचार क्षेत्र बरवाला होगा। #समय_रहते_पहचान_लो उस महान संत को।
🔮फ्लोरेंस की भविष्यवाणी "संत रामपाल जी" के बारे में
"कि उस संत की विचारधारा क्रान्ति से भौतिकवादी मान्यताएं बदलेंगी और बुद्धिजीवियों में ऐसी चिन्तन चेतना का विकास होगा, जिसे आध्यात्मवादी सोच कहने में किसी को कदाचित ही संकोच होगा।
🔮अमेरिका की महिला भविष्यवक्ता ‘‘जीन डिक्सन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अंत से पहले विश्व में एक घोर हाहाकार तथा मानवता का संहार होगा। वैचारिक युद्ध के बाद आध्यात्मिकता पर आधारित एक नई सभ्यता सम्भवतः भारत के ग्रामीण परिवार के व्यक्ति के नेतृत्व में जमेगी और संसार से युद्ध को सदा-सदा के लिए विदा कर देगी।
🔮मथुरा वाले बाबा जयगुरूदेव (तुलसीदास) द्वारा सन् 7 सितम्बर 1971 में एक भविष्यवाणी
"वह अवतार जिसकी लोग प्रतिक्षा कर रहै है वह 20 वर्ष का हो चुका है। 8 सितम्बर 1971 में सतगुरु रामपाल जी महाराज जी पूरे 20 वर्ष के हो गए थे। वही पूर्ण संत हैं, ये भविष्यवाणी उन्हीं पर सटीक बैठती है।
🔮भविष्यवक्ता ‘‘श्री वेजीलेटिन’’ के अनुसार भारत से उत्पन्न हुई शांति भ्रातृत्व भाव पर आधारित नई सभ्यता, संसार में-देश, प्रांत और जाति की सीमायें तोड़कर विश्वभर में अमन व चैन उत्पन्न करेगी।
🔮अमेरिका के ‘‘श्री एण्डरसन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21वीं सदी के प्रथम दशक में भारत के एक देहात का एक धार्मिक व्यक्ति, एक मानव, एक भाषा और झण्डा की रूपरेखा का संविधान बनाकर संसार को सदाचार, उदारता, मानवीय सेवा व प्यार का सबक देगा।
🔮हॉलैण्ड के भविष्यदृष्टा ‘‘श्री गेरार्ड क्राइसे’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21 वीं सदी के प्रथम दशक में भारत का एक महापुरूष सम्पूर्ण विश्व को मानवता के एक सूत्र में बांध देगा।
🔮अमेरिका के भविष्वक्ता ‘‘श्री चार्ल्स क्लार्क’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले एक देश विज्ञान की उन्नति में सब देशों को पछाड़ देगा। परन्तु भारत की प्रतिष्ठा विशेषकर इसके धर्म और दर्शन से होगी, जिसे पूरा विश्व अपना लेगा।
🔮हंगरी की महिला ज्योतिषी ‘‘बोरिस्का’’ के अनुसार सन् 2000 ई. से पहले-पहले उग्र परिस्थितियों हत्या और लूटमार के बीच ही मानवीय सद्गुणों का विकास एक भारतीय फरिश्ते के द्वारा होगा।
🔮फ्रांस के डाॅ. जूलर्वन के अनुसार सन् 1990 के बाद योरोपीय देश भारत की धार्मिक सभ्यता की ओर तेजी से झुकेंगे। सन् 2000 तक विश्व की आबादी 640 करोड़ के आस-पास होगी। भारत से उठी ज्ञान की धार्मिक क्रांति नास्तिकता का नाश करके आँधी तूफान की तरह सम्पूर्ण विश्व को ढ़क लेगी।
🔮फ्रांस के ‘‘नास्त्रेदमस’’ के अनुसार विश्व भर में सैनिक क्रांतियों के बाद थोड़े से ही अच्छे लोग संसार को अच्छा बनाऐंगे। नास्त्रेदमस शतक 1 श्लोक 50 में प्रमाणित कर रहा है कि तीन ओर से सागर से घिरे द्वीप में उस महान संत का जन्म होगा।

Friday, 15 May 2020

पूर्ण परमात्मा के संदेश वाहक





             कलयुग का मसीहा
🔮भविष्यवाणियों से सिद्ध हो चुका है कि वह महापुरुष ही दुनिया को बचायेगा इसलिए Saint Rampal Ji को
#समय_रहते_पहचान_लो
🔮जगत का तारणहार इस धरती पर आ चुका है, वही दुनिया के दुख दूर कर सकता है।
#समय_रहते_पहचान_लो
🔮भारत का एक महान संत, भारत ही नहीं पूरे विश्व में स्वर्ण युग लाएगा।  #समय_रहते_पहचान_लो
🔮प्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं ने कहा है कि भारत का एक महापुरुष ही तीसरे विश्व युद्ध को रोकेगा व दुनिया में शांति लाएगा 
#समय_रहते_पहचान_लो
🔮असली संकट मोचन, असली जीवन रक्षक आज हमारे बीच है। #समय_रहते_पहचान_लो उनको।  वही है जो सारी मुसीबतों, आपदाओं, कष्टों से बचाने की गारंटी देता है।
🔮भारत का एक परम संत सतभक्ति देकर सबके दुख दूर करने आया है। उसका उद्देश्य केवल परमार्थ ही है। वही आत्मा को सुखी करके उसके स्थायी निवास सतलोक पहुंचा सकता है।
🔮एक ऐसा महापुरुष जो मानव को हमेशा के लिए काल के जाल से छुड़वाकर अविनाशी धाम ले जाएगा। वह आज भारत की पवित्र भूमि पर मौजूद है। उसे #समय_रहते_पहचान_लो
कहीं ऐसे न बने
अच्छे दिन पीछे गए सतगुरु से किया न हेत।
अब पछतावा क्या करे जब चिड़िया चुग गयी खेत।।
🔮सतगुरु रामपाल जी महाराज मानव कल्याण के लिए ही इतना संघर्ष कर रहे हैं। वही धरती पर जीव का उद्धार करने व मोक्ष देने के लिए आये हैं। उनको #समय_रहते_पहचान_लो
🔮सतगुरु रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर सर्व मानव समाज मानव धर्म का पालन करेगा और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सतलोक जाएंगे।
🔮संत रामपाल जी महाराज को पहचानिए!
नास्त्रेदमस ने कहा था स्वतंत्रता के चार वर्ष बाद 1951 में भारत में एक महान संत का जन्म होगा जो विश्व को नऐ ज्ञान से परिचित कराएगा। 8 सितंबर 1951 को संत रामपालजी महाराज का जन्म हुआ, ये भविष्यवाणी उन्हीं के लिए हुई है।
🔮पहचानिए कौन है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के अनुसार वो महान संत
”जिस समय उस तत्वदृष्टा शायरन का आध्यात्मिक जन्म होगा उस दिन अंधेरी अमावस्या होगी। उस समय उस विश्व नेता की आयु 16, 20, 25 वर्ष नहीं होगी, वह तरुण नहीं होगा, बल्कि वह प्रौढ़ होगा और वह 50 और 60 वर्ष के बीच की उम्र में संसार में प्रसिद्ध होगा। वह सन् 2006 होगा।“
🔮नास्त्रेदमस के अनुसार वह विश्व धार्मिक नेता सतगुरु रामपाल जी महाराज ही हैं जिनकी अध्यक्षता में भारतवर्ष पूरे विश्व पर राज्य करेगा। पूरे विश्व में एक ही ज्ञान (भक्ति मार्ग) चलेगा। एक ही कानून होगा, कोई दुःखी नहीं रहेगा, विश्व में पूर्ण शांति होगी।
🔮इंग्लैण्ड के ज्योतिषी ‘कीरो’ ने सन् 1925 में लिखी पुस्तक में भविष्यवाणी की है, बीसवीं सदी अर्थात् सन् 2000 ई. के उत्तरार्द्ध में भारत का वह एक व्यक्ति सारे संसार में ज्ञानक्रांति ला देगा।
🔮भाई बाले वाली जन्म साखी में भी लिखा है कि उस महान संत का जन्म जाट जाति में होगा और उसका प्रचार क्षेत्र बरवाला होगा। #समय_रहते_पहचान_लो उस महान संत को।
🔮फ्लोरेंस की भविष्यवाणी "संत रामपाल जी" के बारे में
"कि उस संत की विचारधारा क्रान्ति से भौतिकवादी मान्यताएं बदलेंगी और बुद्धिजीवियों में ऐसी चिन्तन चेतना का विकास होगा, जिसे आध्यात्मवादी सोच कहने में किसी को कदाचित ही संकोच होगा।
🔮अमेरिका की महिला भविष्यवक्ता ‘‘जीन डिक्सन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अंत से पहले विश्व में एक घोर हाहाकार तथा मानवता का संहार होगा। वैचारिक युद्ध के बाद आध्यात्मिकता पर आधारित एक नई सभ्यता सम्भवतः भारत के ग्रामीण परिवार के व्यक्ति के नेतृत्व में जमेगी और संसार से युद्ध को सदा-सदा के लिए विदा कर देगी।
🔮मथुरा वाले बाबा जयगुरूदेव (तुलसीदास) द्वारा सन् 7 सितम्बर 1971 में एक भविष्यवाणी
"वह अवतार जिसकी लोग प्रतिक्षा कर रहै है वह 20 वर्ष का हो चुका है। 8 सितम्बर 1971 में सतगुरु रामपाल जी महाराज जी पूरे 20 वर्ष के हो गए थे। वही पूर्ण संत हैं, ये भविष्यवाणी उन्हीं पर सटीक बैठती है।
🔮भविष्यवक्ता ‘‘श्री वेजीलेटिन’’ के अनुसार भारत से उत्पन्न हुई शांति भ्रातृत्व भाव पर आधारित नई सभ्यता, संसार में-देश, प्रांत और जाति की सीमायें तोड़कर विश्वभर में अमन व चैन उत्पन्न करेगी।
🔮अमेरिका के ‘‘श्री एण्डरसन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21वीं सदी के प्रथम दशक में भारत के एक देहात का एक धार्मिक व्यक्ति, एक मानव, एक भाषा और झण्डा की रूपरेखा का संविधान बनाकर संसार को सदाचार, उदारता, मानवीय सेवा व प्यार का सबक देगा।
🔮हॉलैण्ड के भविष्यदृष्टा ‘‘श्री गेरार्ड क्राइसे’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21 वीं सदी के प्रथम दशक में भारत का एक महापुरूष सम्पूर्ण विश्व को मानवता के एक सूत्र में बांध देगा।
🔮अमेरिका के भविष्वक्ता ‘‘श्री चार्ल्स क्लार्क’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले एक देश विज्ञान की उन्नति में सब देशों को पछाड़ देगा। परन्तु भारत की प्रतिष्ठा विशेषकर इसके धर्म और दर्शन से होगी, जिसे पूरा विश्व अपना लेगा।
🔮हंगरी की महिला ज्योतिषी ‘‘बोरिस्का’’ के अनुसार सन् 2000 ई. से पहले-पहले उग्र परिस्थितियों हत्या और लूटमार के बीच ही मानवीय सद्गुणों का विकास एक भारतीय फरिश्ते के द्वारा होगा।
🔮फ्रांस के डाॅ. जूलर्वन के अनुसार सन् 1990 के बाद योरोपीय देश भारत की धार्मिक सभ्यता की ओर तेजी से झुकेंगे। सन् 2000 तक विश्व की आबादी 640 करोड़ के आस-पास होगी। भारत से उठी ज्ञान की धार्मिक क्रांति नास्तिकता का नाश करके आँधी तूफान की तरह सम्पूर्ण विश्व को ढ़क लेगी।
🔮फ्रांस के ‘‘नास्त्रेदमस’’ के अनुसार विश्व भर में सैनिक क्रांतियों के बाद थोड़े से ही अच्छे लोग संसार को अच्छा बनाऐंगे। नास्त्रेदमस शतक 1 श्लोक 50 में प्रमाणित कर रहा है कि तीन ओर से सागर से घिरे द्वीप में उस महान संत का जन्म होगा।
#समय_रहते_पहचान_लो संत रामपाल जी को ,वरना बहुुुत पछताना पड़ेगा।
https://www.jagatgururampalji.org/jeene-ki-rah.pdf






Thursday, 14 May 2020

सांच को आंच नहीं


                      प्रमाणित सत्य



🔖पवित्र वेदों व गीता जी आदि पवित्र सदग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तब परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परम संत यानी सच्चे सतगुरु को भेजकर सत्य ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना करता है।
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज द्वारा ही सत्य ज्ञान दिया जा रहा है।
🔖श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है।
यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं।
🔖यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है।
ऐसा केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।
🔖पूर्ण संत तीन प्रकार के मंत्रों को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या 822 में मिलता है।
संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो तीन प्रकार के मंत्रों  का तीन बार में उपदेश करते हैं।
🔖सच्चा सतगुरु वही है जो भक्त समाज को शास्त्र अनूकूल भक्ति साधना बताए।
शास्त्र अनूकूल भक्ति साधना केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही मौजूद है।
🔖सच्चा सतगुरु वो है जो हमारे सभी धर्मों के सदग्रन्थों से प्रमाणित ज्ञान व सतभक्ति देकर मोक्ष दिला दे।
मोक्षदायक भक्ति केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।
🔖पूर्ण गुरु जब सत्य ज्ञान का प्रचार करता है तो सभी नकली गुरु जनता द्वारा उसका विरोध करा देते हैं। जबकि पूर्ण गुरु का ज्ञान शास्त्र प्रमाणित होता है।
ये बातें संत रामपाल जी महाराज पर ही खरी उतरती हैं।
🔖जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।
-पूर्ण संत रामपाल जी महाराज
पूर्ण गुरु समाज से जाति व धर्म का भेद मिटाता है।
🔖आज तक किसी भी संत ने यह नहीं बताया कि श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान काल/ब्रह्म ने श्रीकृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके बोला था।
यह भेद केवल पूर्ण संत रामपाल जी ने ही प्रमाण सहित बताया है।
🔖वेद कतेब झूठे नाहि, झूठे हैं जो समझे नाहि।
पूर्ण गुरु सभी सद्ग्रन्थों का ज्ञाता होता है।
सद्ग्रन्थों की पूर्ण जानकारी केवल पूर्ण संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।
🔖नकली संत कहते हैं कि सद्भक्ति से पापकर्म नहीं कटते, भोगने ही पड़ेंगे। जबकि सच्चे गुरु संत रामपाल जी महाराज सभी शास्त्रों से प्रमाणित करके बताते हैं कि सद्भक्ति से पापकर्म कटते हैं और कैंसर क्या कैंसर का बाप भी ठीक होता है।
🔖सच्चा सतगुरु अपने सत्य ज्ञान से स्वच्छ समाज का निर्माण करता है। संत रामपाल जी महाराज के नेतृत्व में पाखण्ड मुक्त, नशा मुक्त, दहेजमुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त समाज तैयार हो रहा है।
🔖वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है।
वर्तमान में केवल सतगुरु रामपाल जी महाराज ही हैं जो सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकार हैं, उनके द्वारा बताई गई भक्ति विधि भी पूर्ण रूप से शास्त्रों से प्रमाणित है।
🔖संत गरीबदास जी के अनुसार पूर्ण संत की पहचान
पूर्ण संत तीन समय की पूजा बताता है। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताता है वह जगत का उपकारक संत होता है।
वर्तमान में वह पूर्ण संत रामपाल जी महाराज ही हैं।
🔖कबीर साहिब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को बताते हैं कि जो मेरा संत सतभक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत व महंत झगड़ा करेंगे यह उसकी पहचान होगी।
जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावे।
वाके संग सभी राड बढ़ावे।।
यह सब बातें सच्चे सतगुरु रामपाल जी महाराज पर ही खरी उतरती हैं।
🔖सच्चा सतगुरु वही है जिसके द्वारा बताई गई भक्ति विधि शास्त्र प्रमाणित हो।
शास्त्र प्रमाणित भक्ति पूरे विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।
🔖सच्चा सतगुरु वो है जो हमारे सभी धर्मों के सदग्रन्थों से प्रमाणित ज्ञान व सतभक्ति देकर जन्म-मृत्यु से छुटकारा दिला दे।
सद्ग्रन्थों पर आधारित भक्ति केवल संत रामपाल जी महाराज ही बताते हैं।
🔖 सतगुरु की पहचान संत गरीबदास जी की वाणी में -
”सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।“
पूर्ण संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा।
सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकर संत रामपाल जी महाराज हैं जो सतभक्ति देकर मानव को सभी बुराइयों से दूर कर रहे हैं।
🔖पूर्ण संत की पहचान
पूर्ण संत भिक्षा व चंदा मांगता नहीं फिरेगा।
🔖पवित्र सदग्रन्थों जैसे श्रीमद्भगवद गीता जी, वेद, गुरु ग्रंथ साहेब, बाइबिल, कुरान से कबीर साहेब जी को परमात्मा सिद्ध करने वाले संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण तथा सच्चे गुरु हैं।
🔖यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा करवाएगा। वह जगत का उपकारक संत सच्चा सतगुरु होगा।
इस परमार्थ के कार्य को केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।
🔖पूर्ण गुरु के लक्षण
पूर्ण संत सर्व वेद-शास्त्रों का ज्ञाता होता है।
दूसरे वह मन-कर्म-वचन से यानि सच्ची श्रद्धा से केवल एक परमात्मा समर्थ की भक्ति स्वयं करता है तथा अपने अनुयाईयों से करवाता है।
तीसरे वह सब अनुयाईयों से समान व्यवहार (बर्ताव) करता है।
चौथे उसके द्वारा बताया भक्ति
कर्म वेदों में वर्णित विधि के अनुसार होता है।
🔖कुरान ज्ञान दाता हजरत मुहम्मद जी को कहता है कि उस अल्लाह की जानकारी किसी बाख़बर इल्मवाले संत से पूछो।
वह बाख़बर इल्मवाले संत रामपाल जी महाराज हैं जो अल्लाह की सम्पूर्ण जानकारी रखते हैं।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज के सत्संग साधना टीवी पर शाम 7,30pm से







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Monday, 11 May 2020

कथा नामदेव की

नामदेव जी की जीवनी 
   


        संत शिरोमणि श्री नामदेवजी का जन्म "पंढरपुर", मराठवाड़ा, महाराष्ट्र (भारत) में "26 अक्टूबर, 1270 , कार्तिक शुक्ल एकादशी संवत् १३२७, रविवार" को सूर्योदय के समय हुआ था. महाराष्ट्र के सातारा जिले में कृष्णा नदी के किनारे बसा "नरसी बामणी गाँव, जिला परभणी उनका पैतृक गांव है." संत शिरोमणि श्री नामदेव जी का जन्म "शिम्पी" (मराठी) , जिसे राजस्थान में "छीपा" भी कहते है, परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम दामाशेठ और माता का नाम गोणाई (गोणा बाई) था। इनका परिवार भगवान विट्ठल का परम भक्त था।

        नामदेवजी का विवाह कल्याण निवासी राजाई (राजा बाई) के साथ हुआ था और इनके चार पुत्र व पुत्रवधु यथा "नारायण - लाड़ाबाई", "विट्ठल - गोडाबाई", "महादेव - येसाबाई" , व "गोविन्द - साखराबाई" तथा एक पुत्री थी जिनका नाम लिम्बाबाई था. श्री नामदेव जी की बड़ी बहन का नाम आऊबाई था. उनके एक पौत्र का नाम मुकुन्द व उनकी दासी का नाम "संत जनाबाई" था, जो संत नामदेवजी के जन्म के पहले से ही दामाशेठ के घर पर ही रहती थी.

        संत शिरोमणि श्री नामदेवजी के नानाजी का नाम गोमाजी और नानीजी का नाम उमाबाई था. संत नामदेवजी ने विसोबा खेचर को गुरु के रूप में स्वीकार किया था। विसोबा खेचर का जन्म स्थान पैठण था, जो पंढरपुर से पचास कोस दूर "ओंढ्या नागनाथ" नामक प्राचीन शिव क्षेत्र में हैं. इसी मंदिर में इन्होंने संत शिरोमणि श्री नामदेवजी को शिक्षा दी और अपना शिष्य बनाया। संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर के समकालीन थे और उम्र में उनसे 5 साल बड़े थे।

        पिता की नेकी का असर पुत्र पर भी पड़ा| वहा भी साधू संतो के पास बैठता| वह उनसे उपदेश भरे वचन सुनता रहता| उनके गाँव मैं देवता का मन्दिर था| जिसे विरोभा देव का मन्दिर कहा जाता था| वहाँ जाकर लोग बैठते व भजन करते थे| वह भी बच्चो को इकट्ठा करके भजन - कीर्तन करवाता| सभी उसको शुभ बालक कहते थे| वह बैरागी और साधू स्वभाव का हो गया| कोई काम काज भी न करता और कभी - कभी काम काज करता हुआ राम यश गाने लगता|

        एक दिन पिता ने उससे कहा - बेटा कोई काम काज करो| अब काम के बिना गुजारा नहीं हो सकता| कर्म करके ही परिवार को चलाना है| अब तुम्हारा विवाह भी हो चुका है| "विवाह तो अपने कर दिया" नामदेव बोला| लेकिन मेरा मन तो भक्ति में ही लगा हुआ है| क्या करूँ? जब मन नहीं लगता तो ईश्वर आवाजें मरता रहता है|  बेटा! भक्ति भी करो| भक्ति करना कोई गलत कार्य नहीं है लेकिन जीवन निर्वाह के लिए रोजी भी जरुरी है| वह भी कमाया करो| ईश्वर रोजी में बरकत डाले गा|  नामदेव जी की शादी छोटी उम्र में ही हो गई| उनकी पत्नी का नाम राजाबाई था| नामदेव का कर्म - धर्म भक्ति करने को ही लोचता था| पर उनकी पत्नी ने उन्हें व्यापार कार्य में लगा दिया| परन्तु वह असफल रहा|

प्रसंग :
     
        एक बार संत नामदेव अपने शिष्यों को ज्ञान -भक्ति का प्रवचन दे रहे थे। तभी श्रोताओं में बैठे किसी शिष्य ने एक प्रश्न किया , ” गुरुवर , हमें बताया जाता है कि ईश्वर हर जगह मौजूद है , पर यदि ऐसा है तो वो हमें कभी दिखाई क्यों नहीं देता , हम कैसे मान लें कि वो सचमुच है , और यदि वो है तो हम उसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं ?” नामदेव मुस्कुराये और एक शिष्य को एक लोटा पानी और थोड़ा सा नमक लाने का आदेश दिया। उस शिष्य से कहा , ” पुत्र , तुम नमक को लोटे में डाल कर मिला दो। संत बोले , ” बताइये , क्या इस पानी में किसी को नमक दिखाई दे रहा है ?” सबने  ‘नहीं ‘ में सिर हिला दिए। “ठीक है!, अब कोई ज़रा इसे चख कर देखे , क्या चखने पर नमक का स्वाद आ रहा है ?”, संत ने पुछा। “जी”, एक शिष्य पानी चखते हुए बोला।

        “अच्छा, अब जरा इस पानी को कुछ देर उबालो।”, संत ने निर्देश दिया। कुछ देर तक पानी उबलता रहा और जब सारा पानी भाप बन कर उड़ गया , तो संत ने पुनः शिष्यों को लोटे में देखने को कहा और पुछा , ” क्या अब आपको इसमें कुछ दिखाई दे रहा है ?” “जी , हमें नमक के कण दिख रहे हैं।”, एक शिष्य बोला। संत मुस्कुराये और समझाते हुए बोले ,” जिस प्रकार तुम पानी में नमक का स्वाद तो अनुभव कर पाये पर उसे देख नहीं पाये उसी प्रकार इस जग में तुम्हे ईश्वर हर जगह दिखाई नहीं देता पर तुम उसे अनुभव कर सकते हो। और जिस तरह अग्नि के ताप से पानी भाप बन कर उड़ गया और नमक दिखाई देने लगा उसी प्रकार तुम भक्ति ,ध्यान और सत्कर्म द्वारा अपने विकारों का अंत कर भगवान को प्राप्त कर सकते हो।”

प्रसंग :

        एक कथा सुनी हैं कि एक बार श्री नामदेव जी महाराज तीर्थ यात्रा पर गए हुए थे । यात्रा में क्ही पर एक वृक्ष के नीचे उन्होंने रोटियाँ बनाई और सामान में से घी लेने के लिए पीछे घूमे तो इतने में ही एक कुत्ता आकर मुँह में रोटी लेकर भाग गया । नामदेव जी महाराज ने घी लेकर देखा कि कुत्ता रोटी लेकर भाग रहा हैं तो वे भी हाथ में घी का पात्र लिये हुए उसके पीछे भागते हुए कहने लगे – ‘हे मेरे नाथ ! आपको ही तो भोग लगाना हैं, फिर रोटी लेकर क्यों भाग रहे हो ? रोटी पर थोड़ा घी तो लगाने दीजिये ।’ नामदेव जी के ऐसा कहते ही कुत्ते में से भगवान् प्रकट हो गए ।

        नामदेव वे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत हो गए हैं। इनके समय में नाथ और महानुभाव पंथों का महाराष्ट्र में प्रचार था। नाथ पंथ "अलख निरंजन" की योगपरक साधना का समर्थक तथा बाह्याडंबरों का विरोधी था और महानुभाव पंथ वैदिक कर्मकांड तथा बहुदेवोपासना का विरोधी होते हुए भी मूर्तिपूजा को सर्वथा निषिद्ध नहीं मानता था। इनके अतिरिक्त महाराष्ट्र में पंढरपुर के "विठोबा" की उपासना भी प्रचलित थी। सामान्य जनता प्रति वर्ष आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी को उनके दर्शनों के लिए पंढरपुर की "वारी" (यात्रा) किया करती थी (यह प्रथा आज भी प्रचलित है) इस प्रकार की वारी (यात्रा) करनेवाले "वारकरी" कहलाते हैं। विट्ठलोपासना का यह "पंथ" "वारकरी" संप्रदाय कहलाता है। नामदेव इसी संप्रदाय के प्रमुख संत माने जाते हैं।
नामदेव जी को  कबीर साहेब मिले,
 उन्हें सतनाम का उपदेश किया ।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज के सत्संग साधना टीवी पर शाम 7:30 से

https://youtu.be/MgQ1mB7cz3c

        

Sunday, 10 May 2020

बोध कथा



*भक्ति न करने से हानि का विवरण:-*

यह दम टूटै पिण्डा फूटै, हो लेखा दरगाह मांही।
उस दरगाह में मार पड़ैगी, जम पकड़ेंगे बांही।।

नर-नारायण देहि पाय कर, फेर चैरासी जांही।
उस दिन की मोहे डरनी लागे, लज्जा रह के नांही।।

जा सतगुरू की मैं बलिहारी, जो जामण मरण मिटाहीं।
कुल परिवार तेरा कुटम्ब कबीला, मसलित एक ठहराहीं।

बाँध पींजरी आगै धर लिया, मरघट कूँ ले जाहीं।।
अग्नि लगा दिया जब लम्बा, फूंक दिया उस ठाहीं।
पुराण उठा फिर पण्डित आए, पीछे गरूड पढाहीं।।


*भावार्थ:- यह दम अर्थात् श्वांस जिस दिन समाप्त हो जाऐंगे। उसी दिन यह शरीर रूपी पिण्ड छूट जाएगा। फिर परमात्मा के दरबार में पाप-पुण्यों का हिसाब होगा। भक्ति न करने वाले या शास्त्राविरूद्ध भक्ति करने वाले को यम के दूत भुजा पकड़कर ले जाऐंगे, चाहे कोई किसी देश का राजा भी क्यों न हो, उसकी पिटाई की जाएगी। सन्त गरीबदास को परमेश्वर कबीर जी मिले थे। उनकी आत्मा को ऊपर लेकर गए थे। सर्व ब्रह्माण्डों को दिखाकर सम्पूर्ण अध्यात्म ज्ञान समझाकर वापिस शरीर में छोड़ा था। सन्त गरीब दास जी आँखों देखा हाल बयान कर रहे हैं कि:- हे मानव! आपको नर शरीर मिला है जो नारायण अर्थात् परमात्मा के शरीर जैसा अर्थात् उसी का स्वरूप है। अन्य प्राणियों को यह सुन्दर शरीर नहीं मिला। इसके मिलने के पश्चात् प्राणी को आजीवन भगवान की भक्ति करनी चाहिए। ऐसा परमात्मा स्वरूप शरीर प्राप्त करके सत्य भक्ति न करने के कारण फिर चैरासी लाख वाले चक्र में जा रहा है, धिक्कार है तेरे मानव जीवन को! मुझे तो उस दिन की चिन्ता बनी है, डर लगता है कि कहीं भक्ति कम बने और उस परमात्मा के दरबार में पता नहीं इज्जत रहेगी या नहीं। मैं तो भक्ति करते-करते भी डरता हूँ कि कहीं भक्ति कम न रह  ए। आप तो भक्ति ही नहीं करते। यदि करते हो तो शास्त्राविरूद्ध कर रहे हो। तुम्हारा तो बुरा हाल होगा और मैं तो राय देता हूँ कि ऐसा सतगुरू चुनो जो जन्म-मरण के दीर्घ रोग को मिटा दे, समाप्त कर दे। जो सत्य भक्ति नहीं करते, उनका क्या हाल होता है मृत्यु के पश्चात्। आस-पास के कुल के लोग इकट्ठे हो जाते हैं। फिर सबकी एक ही मसलत अर्थात् राय बनती है कि इसको उठाओ। (उठाकर शमशान घाट पर ले जाकर फूँक देते हैं, लाठी या जैली की खोद (ठोकर) मार-मारकर छाती तोड़ते हैं। सम्पूर्ण शरीर को जला देते हैं। जो कुछ भी जेब में होता है, उसको निकाल लेते हैं। फिर शास्त्राविधि त्यागकर मनमाना आचरण कराने और करने वाले उस संसार से चले गए जीव के कल्याण के लिए गुरू गरूड पुराण का पाठ करते हैं।) तत्वज्ञान (सूक्ष्मवेद) में कहा है कि अपना मानव जीवन पूरा करके वह जीव चला गया। परमात्मा के दरबार में उसका हिसाब होगा। वह कर्मानुसार कहीं गधा-कुत्ता बनने की पंक्ति में खड़ा होगा। मृत्यु के पश्चात् गरूड पुराण का पाठ उसके क्या काम आएगा। यह व्यर्थ का शास्त्राविरूद्ध क्रियाक्रम है। उस प्राणी का मनुष्य शरीर रहते उसको भगवान के संविधान का ज्ञान करना चाहिए था। जिससे उसको अच्छ -बुरे का ज्ञान होता और वह अपना मानव जीवन सफल करता।*

आध्यात्मिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज जी का शुभ प्रवचन सुनें। साधना चैनल पर। रोजाना 7:30 से 8:30 बजे से

*अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर जा सकते हैं। 👇*

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